Our Responsibility…..

बचपन से लेकर जिम्मेदार होने तक का सफर हम अपने माँ पिता के साथ के सिवा नही काट सकते। Mummy dady को ही हमारी सारी जरूरते पूरी करनी पड़ती हैं।

बहुत प्यार करते हैं ना mom dad???? Dad खुद पुराने shoes पहनते हैं, पर हमें नए दिलाते हैं। Mummi को तो गिनती तक नही आती… एक रोटी मांगते हैं वह 2 लाकर देती हैं। किसी भी स्थिति में माता पिता हमारा साथ नही छोड़ते। पर मात्र जब उन्हें हमारी जरूरत होती हैं हम उनका साथ छोड़ देते हैं।

 कुछ लोग तो बोझ समजने लगते हैं उन्हें, और वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं। बहाने बनाते हैं कि कही काम से बाहर जा रहा हूँ।  जल्द ही लौटर उन्हें वापस घर ले जाने का वादा भी करते हैं। पर वो बेटा कभी लौटकर आता ही नही। एक नही सौ बार उस wrong number पर call कर ते हैं जो बीटा उन्हें देकर जाता हैं। और फ़ोन न लगने पर निराश नही होते बल्कि कहते हैं कि शायद काम कर रहा होगा बेटा मेरा। अगर उन्हें कोई सच बता भी दे तो मानते नही कहते हैं कि मेरा बेटा ऐसा नही हैं वह जरूर काम पूरा करके हमे लेने आयगा। और सिर्फ ईनतजार करते रहते हैं।

 
अगर हमसे कोई हमारी कोई प्रिय व्यक्ति या वस्तु तक दूर हो जाये न तो हम रोने लगते है, गले से निवाला नही उतरता । फ हम तो जान से भी प्यारे हैं अपने माता पिता के लिए…फिर सोचिए वह हमारे सिवाय एक दिन भी कैसे काट पाएंगे? वो भी तब जब उन्हें हमारी जरूरत हैं। आज तक उन्होंने हमे क्या कभी बोझ समाज हैं?? नही न? उन्होंने हमें अपनी जिम्मेदारी समझा हैं। तो क्या आज उन्हें बोझ समझना ठीक हैं???

बुढे माता पिता बोझ नही होते बल्कि आज वो हमारी जिम्मेदारी हैं, जो कि हमे निभानी ही होगी। हा और ऐसा कभी मत कहना कि दिया ही क्या हैं आज तक उन्होंने हमें “ये जन्म दिया हैं उन्होंने चलना सिखा उनकी ऊगली पकड़कर, बोलना सिखा तो माँ सुुुुननेे के लिये तरसने वाली, हम कितने भी बुरे क्यों न हो हमे लाखो में एक समझने वालि हमारि मा होती हैं। गलती करने पर डाट ने वाले और हम नाराज होने पर आकेले में रो ने वाले पिताजी होते है।  पर जब हम बड़े हो जाते हैं तो सब भूल जाते हैं हम। 

हमे सब भूलना नही हैं, जैसे उन्होंने हमें आज तक संभाला हैं वैसे अब हमें उन्हें  संभालना हैं और ये सब करते वक्त ये भूलना नही हैं कि जिन्हें हम संभाल रहे हैं वो कभी हमारे लिए भूखे सोये हैं…….सिर्फ हम पेट भर कहा सके इसलिए… भूखे सोये हैं…….. हमे आज लगता हैैं हम बड़े हो गए हैैं अब उनकी जरूरत नही हैैं हमे….पर उन्ह्हें तो जरूरत हैैं न????

  So ….Remember,

“The hardest part of growing up is is realizing ur parents aare growing up….”Never…. forget…..ur Responsibility……. Never left them alone….. 

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तेरे जैसा यार कहा….

दोस्त नही भाई है तू मेरा भाई. . अक्सर यही lines हर किसी के जुबान पर होती हैं जब भी वह अपने दोस्तो से मिलते है। पर जब दोस्त दूर हो जाते हैं तब लगता हैं भाई नही जान ही दूर हो गयी हैं हमसे …क्योंकि दोस्त तो जान से बढ़कर होते हैं ना?? 

याद आते हैं ना वो दिन जब primary school में chocolate के लिए लड़ते थे। टीचर पढ़ते थे और हम चुपके लड्डू खाते थे…

और फिर क्या punishment मिलती थी…कभी  गर्ल्स तो रोने लगती थी पर बॉयज शान से बाहर निकलजाते थे … पनिशमेंट का भी कुछ अलग ही मजा था । क्योंकि बाहर भी तो मस्ती ही करते थे न। 

जैसी भी थी मस्त थी life। कोई tension नही, न ही status, ego, jealosy बस थी दोस्ती….कुछ दोस्त तो ऐसे भी थे की अगर पैर फिसल जाए तो हासते पहले थे ओर बादमे उठाते थे, चॉकलेट लाओ तो मिल बाटकर खाते थे  मगर 10  चॉकलेट हैं तो 6 उसके 4 हमारे यही था न्याय, कुछ तो घरपर तो बचा लेते थे मगर टीचर से पिटवा देते थे। जैसे भी थे दोस्त थे यार ….और दोस्ती की है तो निभानी तो पड़ेगी इसीलिए वो भी साथ मे गालियां खा लेते थे…सभी टीचर्स का एक favourite dialogue भी था…

जब थोड़े बड़े हुए अकल भी आने लगी थोड़ी बोहोत, अब तो आपस मे ही नही दोस्तो के लिए भी लड़ना सिख गए। अपने दोस्त को कोई कुछ कह दे तो सारी gang मारने चली जाती थी। और कभी कभी तो सभी मार खाकर आ जाते थे। जब किसी frnd की तबीयत खराब हो तो गर्ल्स भी बोहोत care करती थी।अगर कभी किसी दोस्त का अक्स्सीदेेनट हो जाय तो उसकी खैैैरियत की दुुुआ भी मांगते थे.. 

Birthday party या new year का तो मजा ही कुछ अलग था …..

कुछ तो 14 साल की उम्र में जवान भी हो गए थे….सबको कहते थे कि बच्चा हैं तो अभी नही समझने वाला तुझे कुछ। पता नही क्या समझाना चाहते थे। कुछ तो लड़कियों को घर ते ही रहते थे तो कुछ परेशान करते थे……थोड़े comedy थोड़े कमीने थे पर जैसे भी थे …बच्चे थे और तब दोस्त तो जान से प्यारे थे। 
याद हैं आज भी वह दिन जब स्कूल का आखरी दिन था…सबकी आँखें नम हो चुकी थी। स्कूल छोड़कर जाना ही नही चाहते थे…

हमारी लाइफ में बोहोत से लोग आते हैं…कुछ गलतियां करना सिखाते हैं तो कुछ गलतियां सुधारना मगर कुछ खास भी होते हैं जो हमसे दूर तो हो जाते हैं मगर उनकी यादें कभी साथ नही छोड़ती और उन्हें ही हम दोस्त कहते हैं। आगे भी लाइफ में बोहोत से दोस्त मिलेंगे मगर जो वक़्त जो दोस्त पीछे छूट गए हैं उनकी याद में आज भी …school days सभी miss करते हैं और बस उनसे फिर मुलाक़ात करने की आशा रखते हैं……..और उनसे कहना चाहते हैं।

“तेरे जैसा यार कहा….. कहा ऐसा याराना,याद करेगी दुनिया….. तेरा मेरा अफसाना।”

लोग क्या कहेंगे ?????

हर कोई लाइफ में कुछ न कुछ करना चाहते हैं। कुछ बनना चाहते हैं। कोई डॉक्टर बनना चाहता हैं तो कोई इंजीनियर कोई musician बनना चाहता हैं तो कोई dancer, सिर्फ carear ही नही और भी हमारे लाइफ के छोटे छोटे decisions भी हम सोच समझकर खुद लेते हैं सबकी एक अलग choice है एक अलग सोच हैं। कोई किसीके दबाव में नही जिना चाहता। पर सोचिएगा क्या हम सब अपनी मर्जी से सब काम करते हैं ??

अरे ठीकसे सोचो हम अक्सर अपनी मर्जी से कुछ नही करते। जब कोई कुछ अलग करने की सोच रखता हैं ना तो उसे जमाना बेवकूफ़ कहता हैं। सब हसी उड़ाते हैं उसकी…कहते हैं कि “गधा हैं वह“, “अकल घास चरने गयी है उसकी“, “ढोर हैं वो” ऐसे words उसके लिए लोग use करते हैं। पर अगर success हो गया तो ???? तब तो लोग उसका example देंगे अपने बच्चों को कहेंगे –की बचपन से ही वो कामयाब होना चाहता था। कुछ बड़ा हासिल करना चाहता था। बोहोत होशियार था लड़का तभी तो कामियाब हुआ। अरे जब पता था की होशियार हैं तो बचपन से लेकर आज तक काहे ढोर कह रहे थे उसे?? तब क्या तुम्हारी अकल घास चरने गयी थी?? ये सवाल लोगो से  कोई नही पूछता । हम तो बस एक बोझ सर पर लेकर घूमते रेहते हैंं और वह हैं——की 

अगर हम खुद को observe करे तो ऐसी हजारो चिजे हैं जिसमे हमारा personal interest तो बिल्कुल नही रहता पर सिर्फ pressure की वजह से हम करते हैं। 

Example हमारे दोस्त को 96 % आये और हमे 69 तो dad के dialogues “गधे …सबके सामने नाक कटादी मेरी, शर्माजी के बेटे को देख हर exam में top करता हैं में college में टॉप किया करता था और तू बस दिन भर cricket जैसे सचिन तेंदुलकर बनने वाला हैं।” 

( “तू अगर इतना पढ़ा लिखाकर भी कुछ नही बना तो लोग क्या कहेंगे??????” )

Example 2 एक छोटे शहर में रहने वाली लड़की 10th class में 94% score करती है और dad पूछते हैं कि बेटा क्या बनना चाहती हो तुम?? और बेेटी का जवाब – I want to be a boxer अब mom dad – बेटा ज़िद नही करते   माना कि boxing तुम्हे पसंद हैं पर लडकिया ये सब  नही करती , या कहेंगे ये भी कोई करिअर हैंं?? अरे तू क्या. Merry  kom हैं ?? जो boxing करनी हैं?? ” अरे लोग क्या कहेंगे?”  

वो 3 idiot में dialogue हैं ना ” प्यार करता हैं जानवरो से और शादी कर रहा हैं मशीनों से ” अरे वही रिअलिटी हैं और कोई ऐसे success नही होता।  सिर्फ carrier ही नही अपनी life से related कोई भी decision लोगो के pressure में लोगे और अगर Satisfied नही हो पाए तो lifetime खुद को कोसोगे और तब लोग लोग कुछ नही कर पाएंगे गलती सिर्फ आपकी होगी…….

अरे लोगो का क्या है वो तो कुछ न कुछ कहते ही रहते हैं । अगर पढ़ लिखकर गरीब हो तो कहेंगे क्या फायदा इसकी पढ़ाई का? और अचानक अमीर  हो गये तो कहेंगे अचानक इतना पैसा…. जरूर इसने कोई गलत काम किया होगा। अगर जल्दी  घरपर आते हो तो कहेंगे ये तो अक्सर घरपर ही रहता हैं  काम धंधा ठीकसे नही करता होगा और अगर रोज late आते हो घरपर तो कहेंगे ये तो रात को रोज देरसे घरपर आता हैं मैंने कई बार इसे रात में 12 के बाद इसके घरकी bell बजाते हुए सुना हैं। जरूर जुआ खेलता होगा रात को 12 बजे थोड़ी कोई काम से आता होगा। उनसे तो कोई नही पूछता की तुम  काहे  जग रह थे 12 बजे तक?? अरे लोगो का बस चले तो वो तो मछली की भी बुराई करेंगे कि ये मछली तो बस तेहरती ही रहती हैं कभी उड़ती ही नही । 

और एक बात सचिन तेंदुलकर भी पहले एक common boy ही था …Merry Kom अगर लोगो के बारे में सोचती रहती तो National नही जीतती …. “Life is urs not anybody else… ” लोगो का तो काम ही हैं कहना । अगर लोग कहेंगे कीड़े पड़े तेरे मुह में तो क्या सचमे पड़ेंगे क्या? अरे भाई डरो मत कुुुछ नही होंने  वाला । Experience लोगो की advice important  हैं पर सिर्फ तब जब जरूरत हो। अगर अब भी अपना हर Decision लोगो Pressure में   करना चाहते हो  और अगर कुुछ गलत हो गया Fail हो गये तो गलती कीसकी हैैं??

Listen,

“Don’t Care About Anything Anymore Just Live Your LiFe FREE” and don’t forget ” U are beautiful in your own way” 

Is this love……

मुम्बई ….में रहने वाली एक लड़की की कहानी हैं। उस लड़की का नाम था तारा। She was a 10th standard student बाकी आम लड़कियों की तरह ही तारा की life थी । एक swt सी family थी और तारा उनकी बड़ी बेटी थी और उसे एक छोटा भाई बी था। but as we know बचपन में सबका एक 1st crush होता हैं, जिसे हम 1st love true love कहते हैं। Taara also fall in love with a cute boy . Actually it was strange bcoz a 15 year old school girl was in love with 26 year old boy Rajesh.

According to films-) there is no age for love तो भला तारा को क्यों कुछ अजीब लगता??? फिर क्या the needs of love जैसे कि romance के अलावा राजेश की sexual requirements भी तारा पूरी करने लगी, जो कि इस उम्र में गलत था। पर कहते हैं ना anything for love राजेश तारा का use कर रहा हैं ऐसा कभी तारा को लगा ही नही। एक दिन तारा के dad को एक फोनकॉल आया। वह कॉल तारा के  school से principal का था। उन्हें पता चला कि तारा 2 months से school में regular नही जा रही हैं। principal ने कई letters भेजे घरपर मगर तारा ने कभी letter किसी के हाथ नही लगने दिए। mom dad job करते थे तो उनका तारा पर ध्यान देना नही होता था। तारा अक्सर अकेली ही रहती थी। 

Inquiry करने पर पता चला कि तारा एक कैफ़े में जाति थी और school के 6 घंटे वही वही बिताती थी। वही बैठकर मोबाइल पर चैट करते रहती थी और कभी कभी राजेश के साथ कार में बैठकर कही चली जाती थी। जब ये सब उसकी Mom Dad को पता चला they were shocked। उन्होंने तारा से मोबाइल ले लिया और उसका घर से अकेले बाहर निकलना बंद करवा दिया। तारा ने 15 दिन खाना नही खाया न किसीको खाने दिया , वह न खुद सोती थी न किसीको सोने देती थी। उसने अपने भाई की किताबें भी फाड़ दी थी। उसे लगता था कि राजेश से दूर करके घरवालों ने उसका जीना हराम कर दिया है, इसीलिए वह कहती थी कि मैं भी सबका जिना हराम कर दूंगी। 

कुछ दिन बाद पता चला कि तारा pregnant हैं। उसका abortion करवाना पड़ा। घरवालों ने राजेश की police complaint की तो तारा  उन्हें suicide करने की धमकी देने लगी। आखिर घरवालों ने हार मान ली और तारा से कहने लगे की ” तू थोड़ी बड़ी होजाय तो हम राजेश से तेरी शादी करवा देंगे” पर तारा किसीकी कोई बात नही सुन्ना चाहती थी। उसके घरवालों ने राजेश से बात की तो राजेश ने उसे अपनाने से साफ इंकार कर दिया। राजेश ने तो तारा को छोड़ दिया और मजेसे अपनी जिंदगी जी रहा हैं मगर तारा आज भी सदमे में है और उसका पागलपन आज जारी हैं। Is this love???? क्या ऐसा ये पागलपन जो किसीकी life waste कर दे क्या यही प्यार हैं???? No this is not love….its just a addiction….एक ऐसा addiction जो कि किसी की जान भी ले सकता हैं।

आज काल सभी के parents जॉब करते हैं और अपने बच्चो को वक़्त नही दे पाते…और अगर बच्चो से कोई गलती हो रही हो तो उन्हे पता भी नही चलता। 

Taara वाले case में अब गलती किसकी हैं यह सवाल आज सबके के सामने आ खड़ा हैं ??? 

Dear frnds,

“1st Crush sabke life me hota hain but don’t be addicted to some one so much becoz that so much can harm ur life toooo much” 

Life is a…….Test Series

आज 1st day था हमारी टेस्ट सीरीज का my 1st paper – my worst paper. Yesterday I studied whole night. आज जब क्लास में enter हुई तब पता चला कि यार पढ़ाकू बच्चों की test series हैं। by the way I m also studious ha… पर सब ज्यादा पढ़ाकू लग रहे थे। कोई मेरी तरह एक दिन की study करके नही आया था। वो inveligator ऐसे घूर रहे थे जैसे पेपर नही लिखा तो खा जाएंगे मुझे। I worried abt my marks and reputation in claas। 1st day था न और 1st impression is last impression न………???

मेरे सामने न एक रिपीटर बैठी थी। मुझे पेपर आता था पर  350 out of 720 मार्क्स का। और वो रिपीटर बोहोत speed से answers tick कर रही थी। मुझे लगा की शायद उसे ज्यादा आता होगा hence i copied whole paper। जब पेपर सॉल्व करके बाहर आये तो वह मुझे पूछने लगी पेपर कैसा गया???? I replied एकदम jamyaooooo……..means बोहोत अच्छा सॉल्व किया मैने। But she was sad मूझे लगा topper है भाई एक question नही आया होगा इसीलिए शायद sad है, फिर भी formality के लिए पूछ लिया मैंने की क्या हुआ why are u so sad??? She replied की यार कुछ नही आया मुझे वो तो बस tick करने थे इसीलिए तुतके मार दिए। 

“I was shocked”  2 min के लिए  तो ऐसा लगा जैसे अभी पिटाई करदु इसकी फिर थोड़े emotions कंट्रोल किये क्योंकि mistake तो मेरी थी न???अगर पेपर खुद लिखती तो शायद कुछ ज्यादा मार्क्स आते बोहोत guilt feel हुआ। पर अब क्या फायदा marks तो गए न । आज तक बस सुना था कि “लालच बुरी बला हैं” पर आज experience किया। “जेव्हा पोपट झाला तेव्हा कुठ अक्कल आली”….

आज कुछ सीखने को मिला…….की life में कोई shortcut नही होता। मुझे बस कैसे भी 1st आना था i m not interested in studies at all…..शायद बुद्धू duffer हु में फिर भी 1st आना चाहती थी। आज अगर cheating करके 1st आ भी जाती पर बाकी सब test में क्या करती??? हर बार कोई help नही करने वाला। अगर कर भी दे तो बस marks आएंगे knowledge नही और guilt feel होगा …….शायद हर बार……..

टेस्ट सीरीज तो एक example हुआ life में ऐसी 1000 टेस्ट देनी हैं और……कभी exams कभी interviews कभी relations हमारी टेस्ट लेंगे तो कभी हम खुद। हम एक  तो paas होते हैं या fail। success हो जाये तो डिंडोरा पिट देंगे मगर fail हो जाये तो excuses बनाने लगते हैं…

Remember,

Accept the failures अगर कोई चीज समझ नही आती तो नही आती …. एक तो वो हमने छोड़ देना चाहिए या किसीसे सिख लेना चाहिए, 1000 बार कोशिश करनी चाहिए कि क्यों समज नही आ रहा हैं…..पर दिखावा करने से कुछ हासिल नही होने वाला। अरे चींटी भी बोहोत कुछ सीखा जाती हैं, पर सीखना हमे पड़ता हैं …Fail हो जाओगे……Life की एक test में नही ……इस Test series में fail हो जाओगे अगर खुद को accept नही करोगे…

गलती करो एक नही 1000 बार करो। पर हर बार कुछ सीखने की कोशिश करनी चाहिए कि nxt time i will do better…. हा इंसान हैं हम भगवान नही….सब कुछ नही कर सकते हम..पर कुछ न कुछ तो कर सकते हैं ना।

भरोसा रखो यार खुदपर ….. जो पसंद हैं ना वो ही करो पर जब करोगे न तब यही सोचकर शुरुवात करना कि अब हार नही मानना है। गलतियों से सीखना हैं। खुद को accept करना हैं। failures को accept करना हैं। 

And it will lead to a beautiful success….

Remember,

Life is consist of 100000 tests….

If u fail fail in the 1st then don’t be sad just focus on 99999 which are remaining…..

  • Becoz ….LIFE IS A TEST SERIES……

Dream’ssssss

Parents ……..God असतात । हेच आपण लहान पनी पास्नं शिकत आलोय। आणि हेच 101 % खर सुद्धा असतं । parents आपल्या साठी भरपूर कष्ट करतात, आपल्या गरजा पूर्ण करन्यासाठी ते दिवस रात्र झटत असतात। स्वतः उपाशी राहून ते आपलं पोट भारतात।

सर्व नाही पण काही…. Parents कुठेतरी आपल्यावर त्यांचे drms force करतात। त्यांची इच्छा असते की जे त्यांना जे नाही मिळालं ते आपल्याला मिळावं,  जे त्यांचे स्वप्न होते ते आपण पूर्ण करावं। ते आपल्या सर्व गरजा पूर्ण करतात पण त्यांची इच्छा एवढीच असते की आपण अशी life जगाव जशी ते नाही जगू शकले जशी त्यांना हाविए।

example:-    “गोविंद काकांची मुलगी डॉक्टर झाली” आता मुंबई ला आहे आणि तू म्हणते लेखक बनायचं काहीही वेड्या सारखं बोलू नकोस चार लोकात उगाच मान खाली होईल माझी  तू आजून लहान आहेस तुला काई कळत नाही” ……….अस ते म्हणतात आणि बरेचदा खर असतं त्यांचाच आपल्या डोक्यात काही तरी कसलं तरी भूत शिरलं असतं…….जे की temperory असतं……

पण कित्येक जण अशे सुद्धा असतात जे जीव तोडून मेहनत करतात …दिवस रात्र फक्त आपल्या स्वप्नाचा विचार करतात त्यांना काहीच नको असतं पण मात्र स्वप्न पूर्ण करायचं असता…आणि ते capable सुद्धा असतात की स्वप्न पूर्ण करू शकतील। पण फक्त parents मुळे अडकलेले असतात। parents आपला कधी वाईट विचार नाही करत पण आपले decisions मात्र त्यांना चुकीचे वाटतात कारण त्यांचे स्वप्न काही वेगळे असतात। त्यांचा विरोध केल्यावर ते आपल्याला वेड्यात काढतात  आणि म्हणतात की “आम्ही जास्त जग बघितलए तुम्ही लहान आहात सध्या” ……

Dear parents …“तुम्ही जास्त जग बघितलं पण आम्ही त फक्त एक स्वप्न बघितलं ना?” हा खरं आहे मुलांचे decisions चुकतात पण खरंच प्रत्येक decision चुकतं का??.?? Example मला लिहायला आवडत आणि मला doctor होन्या साठी force करसाल तर कस चालल?? जर मी जबरदस्ती  doctor झाले जरी ना तर खूप खराब doctor होईल। आणि मी कितीही success झाले ना  तरी lifetime हाच  विचार करत राहील की लेेखक व्हायच होत doctor झाले। आणि जर मनाप्रमाणे लेेेखक झाले  कदाचित लहान job मिळल पण  मी happy राहील …. Satisfied  राहील कि हा माझा निर्णय होता …..माझ dream होतं…..

Parents… जर मूलं एखाद dream बघताय तर ते dreamच राहील…..पण जर तुमची साथ असेल ना तर dream कितीही मोठं व कठीण असावं …तरी  एक दिवस नक्की ते Dream पास्नं Reality होईल…… ” We just need ur support parents ” जस आज पर्यंत तुमचं बोट धरून चाललोए ना तस च पुढे पण चालायचं ए

काहीच नकोय……….. बस साथ हवा    तुमचा…………….”Forever”

Suicide….Is not a sol’n

Suicide……..ये शब्द अब common हो गया हैं। रोज कहीं लोग अपनी जान दे देते हैं। Teenagers में तो जैसे ये trend चल रहा हैं। जब कोई लड़का/लड़की sucide करते हैं तो सबसे पहले तो लोग उनहे sympathy दिखाते है। और अपनी मर्जी से ही कारण सोच लेते हैं। कोई कहता हैं कि पढ़ाई में कमजोर था/थी और parents के pressure के कारण ये हरकत की तो कोई कहता हैं की gf/bf ने cheat किया होगा बिचारे…….लड़कीयो के मामलेमें तो अक्सर एक ही कारण सोचते हैं sucide का की एक तो rape हुआ हैं..दूसरा की direct pregnant थी लड़की। हुम् कहानिया तो बनालेते हैं….पर कभी seriously नही सोचते कि क्या reason होगा।

Dear frnds….सबके life में एक दिन तो ऐसा जरूर आता हैं कि जब लगता हैं कि बस जान देदे आज , अब कुछ नही बचा इस जिंदगी में बस हुम् अब मरना चाहते हैं….अरे भाई क्यों मरना चाहते हो?? इतनी क्या जल्दी हैं कभी न कभी तो मरना ही हैं तो आज मारने से अच्छा जिलो न अपनी जिंदगी sucide के बारे में सोचने का  reason कोई भी हो पर हर किसी problem का solution sucide नही होता। situation अगर worst भी हो न……….फिर भी solution तो होता हैं। अगर family problem हैं तो mom dad को बोलकर तो देखो शायद सॉल्व हो जाये। अगर पार्टनर ने cheat किया हैं तो आप क्यों मर रहे हो मरना तो उसे चाहिए जिसने cheat किया हैं। अगर आपसे लोग ठीकसे behave नही करते अकेले पड गए हो तो समजो के लायक नही वो आपकी दोस्ती के, वैसे भी जमाना आपके बारे मैं क्या कहता हैं इससे कोई फर्क नही पड़ता आप क्या सोचते हो इससे फर्क पड़ता हैं।

Dear parents…. अगर आपके बेटे या बेटी का behaviour अगर ठीक नही हैं तो उन्हें डाटने के वजह plzz पूछिए की क्या हुआ हैं। शायद वो किसी problem में हो। teenage सारी लाइफ में सबसे important और नाजुक age हैं….इसी age में सब भटकते हैं, सबको लगने लगता हैं कि हमारी life हमारी दुनियां हमारी फैमिली से अलग है। अगर किसी problem में भी हो न तो घरपर अक्सर कोई नही बताता क्योंकि डर होता हैं ना….और ये डर ही एक दिन उनकी जान ले लेता हैं। सो plzzz  ask them ….क्या हुआ हैं? और बताओं उन्हें की आप प्यार करते हो उनसे और हर मुश्किल घड़ी में साथ हो उनके ऐसा करने से शायद वो कोई गलत कदम उठाने से पहले 10 बार जरूर सोचेंगे। 

And again frndss…. आप को कोई हक नही हैं अपनी जान लेने का आप किसीकी बेटी/बीटा बेहेन/भाई हो। आपकी लाइफ सिर्फ आपकी नही हैं। आपको अगर कुछ हो गया तो आपकी family जीते जी मार जायेगी। गलत कदम उठाने से पहले एक बार उनके बारे में जरूर सोचना। और है जान वो देते हैं darpok होते हैं। हिम्मत नही होती हैं उनमें जीने की। अपने सपने पूरे करने की हिम्मत नही होती उनमे ।be strong guys…..एक ही तो life हैं जो कि god gift हैं। तो बस जिना सीखो…past की वजह से मारना नही।

Yesterday is gone…Enjoy ur life today… Tomorrow may never come…..